दूसरी औरत का गर्भ गिर चुका था, पति घर छोड़ रहा था, और पत्नी अपनी सोती हुई बेटी को सीने से लगाकर रो रही थी… तभी सुबह पड़ोस की

PARTIE 1

जिस दिन मीरा ने सब्ज़ी मंडी में मज़ाक में कहा कि उसका पति शायद “किसी दूसरी औरत” के साथ घूम रहा है, उसी पल मिर्च बेचने वाली बूढ़ी औरत के हाथ से पूरी टोकरी नीचे गिर गई और पूरे बाज़ार में ऐसा सन्नाटा छा गया जैसे किसी की मौत की खबर फैल गई हो।

मीरा अपनी 2 साल की बेटी पिहू को गोद में लेकर टमाटर चुन रही थी। गर्मी से उसका चेहरा पसीने में भीगा था, लेकिन असली आग उसके अंदर लगी जब सब्ज़ी वाली कमला आंटी ने दया भरी आँखों से उसे देखा।

“अरे बेटी… मतलब तुझे अभी तक पता नहीं चला?” उसने धीमे से कहा।

मीरा का दिल धड़कना भूल गया।

सुबह ही उसके पति राघव ने माथे पर जल्दी से चुम्मा देकर कहा था कि ऑफिस में मीटिंग है। उसने यह भी कहा था कि फोन मत करना क्योंकि बॉस बहुत गुस्से में है।

लेकिन अब पूरे बाज़ार की निगाहें मीरा पर थीं।

“क्या पता नहीं चला?” मीरा ने काँपती आवाज़ में पूछा।

कमला आंटी ने इधर-उधर देखा, फिर धीरे से बोली, “मंगलवार को तेरे आदमी को देखा था… नई मेडिकल दुकान वाली लड़की के साथ।”

मीरा का हाथ टमाटरों की थैली पर ढीला पड़ गया।

“शायद ग्राहक होगी,” उसने खुद को समझाने की कोशिश की।

कमला आंटी ने दुख से सिर हिलाया।

“ग्राहक लोग कमर पकड़कर नहीं चलते, बेटी।”

पास खड़ा नारियल वाला अचानक चुप हो गया। फूल बेचने वाली औरत ने भी हाथ रोक दिए। पूरा बाज़ार जानता था कि मीरा की शादी टूट रही है… सिर्फ मीरा को छोड़कर।

“कौन है वो?” मीरा ने दाँत भींचकर पूछा।

“नई फार्मेसी वाली गोरी लड़की… लाल नाखून वाली,” कमला आंटी बोली।

मीरा के कानों में तेज़ आवाज़ गूँजने लगी।

वही फार्मेसी जहाँ से राघव उसके लिए प्रेग्नेंसी की दवाइयाँ लाया करता था। वही जगह जहाँ जाने के लिए वह हमेशा कहता था कि रास्ते में पड़ती है।

“मैंने खुद देखा,” कमला आंटी ने कहा, “कल उसने उस लड़की के लिए गुलाब खरीदे।”

मीरा की आँखों के सामने सब धुंधला हो गया।

उसे याद आया कि पिछले हफ्ते राघव उसके लिए सिर्फ सस्ता डिटर्जेंट लाया था और बोला था कि पैसे बचाने होंगे।

उसने मोबाइल निकाला।

राघव के 3 मैसेज थे।

“मीटिंग खत्म होने वाली है।”

“खाना मत रोकना।”

“आई लव यू।”

मीरा के होंठों से अजीब हँसी निकली।

तभी पीछे से एक मीठी आवाज़ आई।

“मीरा?”

मीरा का पूरा शरीर जम गया।

उसने धीरे से पलटकर देखा।

वही लड़की सामने खड़ी थी।

हाथ में ब्रेड का पैकेट… और शरीर पर राघव की नीली जैकेट।

वही जैकेट जिसे मीरा ने रविवार को खुद धोया था।

PARTIE 2

लड़की मुस्कुराई, जैसे सच में मीरा से मिलकर खुश हुई हो। उसके लाल नाखून ब्रेड के पैकेट पर कस गए जब मीरा की नज़र जैकेट पर पड़ी।

“बहुत ठंड थी… किसी ने दे दी,” उसने झूठ बोला।

मीरा हल्का सा हँसी।

“अजीब बात है। मेरे पति के पास भी बिल्कुल ऐसी ही जैकेट है। उसी दाग के साथ।”

लड़की का चेहरा उतर गया।

“राघव तुम्हारे बारे में बहुत बात करता है,” उसने धीरे से कहा।

यह सुनकर मीरा के अंदर कुछ टूट गया। मतलब उसका नाम, उसकी बेटी, उसकी शादी… सब उस दूसरी औरत की बातचीत का हिस्सा थे।

“क्या तुम्हें पता था कि उसकी बेटी भी है?” मीरा ने पूछा।

लड़की चुप रही।

फिर धीमे से बोली, “उसने कहा था तुम लोग अलग रहते हो… सिर्फ बच्ची की वजह से साथ हो।”

मीरा को लगा जैसे किसी ने उसके मुँह पर तमाचा मार दिया हो।

वह बिना कुछ बोले घर लौट आई। पहले उसने पिहू को सुलाया। फिर राघव की अलमारी खोली और उसके कपड़े सूटकेस में भरने लगी।

तभी उसे जेब में एक होटल की रसीद मिली।

और उसके नीचे… मेडिकल स्टोर का बिल।

प्रेग्नेंसी टेस्ट।

दरवाज़ा रात 7:20 पर खुला।

राघव फोन पर हँसते हुए अंदर आया।

“हाँ जान, बाद में कॉल करता हूँ… उसे कुछ शक नहीं—”

वह अचानक रुक गया।

मीरा फर्श पर बैठी थी। हाथ में वही बिल था।

“कौन प्रेग्नेंट है, राघव?”

राघव ने जवाब नहीं दिया।

उसने सिर्फ पिहू के कमरे की तरफ देखा।

और वही नज़र मीरा को सबसे ज़्यादा डरा गई।

भाग 3

राघव का चेहरा सफेद पड़ चुका था। उसने धीरे से फोन काटा और दरवाज़ा बंद कर दिया। कमरे में ऐसा सन्नाटा था कि पिहू की साँसों की आवाज़ भी सुनाई दे रही थी।

“मीरा… बात वैसी नहीं है जैसी तुम सोच रही हो,” उसने काँपती आवाज़ में कहा।

मीरा हँसी, लेकिन उस हँसी में दर्द था।

“अजीब बात है। आजकल हर चीज़ बिल्कुल वैसी ही निकल रही है जैसी मैं सोचती हूँ।”

राघव कुर्सी पर बैठ गया। माथे पर हाथ रखकर कुछ देर चुप रहा, फिर बोला, “उसका नाम काव्या है।”

बस एक नाम।

लेकिन उस एक नाम ने मीरा की पूरी शादी को तोड़ दिया।

“कितने समय से?” मीरा ने पूछा।

राघव ने जवाब देने में देर की।

और वही देर सब बता गई।

“8 महीने,” उसने आखिर कहा।

मीरा का दिल बैठ गया।

पिहू अभी सिर्फ 2 साल की थी। इन 2 सालों में मीरा रात-रात भर बच्ची संभालती रही, खुद को आईने में बदसूरत महसूस करती रही, हर दिन थकान में जीती रही… जबकि उसी समय उसका पति किसी और औरत के साथ नई ज़िंदगी जी रहा था।

“क्या वो प्रेग्नेंट है?” मीरा ने पूछा।

राघव ने सिर झुका लिया।

“आज सुबह उसका बच्चा गिर गया।”

कमरे की हवा जैसे रुक गई।

मीरा कुछ पल तक कुछ बोल ही नहीं पाई।

उसे अचानक समझ आया कि जब वह मंडी में सब्ज़ियाँ खरीद रही थी, तब दूसरी औरत अस्पताल में खून बहा रही होगी… और दोनों जगहों पर एक ही आदमी मौजूद था।

राघव रोने लगा।

धीरे… टूटा हुआ… लेकिन बहुत देर से।

“मैं सब ठीक करना चाहता था,” उसने कहा।

“2 औरतों से झूठ बोलकर?” मीरा चीखी नहीं। उसकी आवाज़ अब बहुत शांत थी। “या 2 ज़िंदगियाँ बर्बाद करके?”

राघव ने पहली बार उसकी आँखों में देखा।

“तुम्हारे साथ मुझे घर मिलता था… उसके साथ मुझे लगता था कि मैं फिर जवान हूँ।”

यह सुनकर मीरा को लगा जैसे किसी ने उसके सीने में चाकू घुमा दिया।

उसने इस आदमी के लिए खाना बनाया, कपड़े धोए, बच्ची पाली, हर मुश्किल में उसका साथ दिया… और बदले में वह सिर्फ “जवान महसूस” करना चाहता था।

कुछ देर दोनों चुप बैठे रहे।

फिर मीरा ने पूछा, “क्या तुम उससे प्यार करते हो?”

राघव ने जवाब देने में फिर देर की।

और वही देर आखिरी जवाब थी।

मीरा ने सूटकेस उसकी तरफ खिसका दिया।

“निकल जाओ।”

राघव की आँखें भर आईं।

“मैं तुम दोनों को खोना नहीं चाहता।”

मीरा की आँखों से आखिर आँसू निकल पड़े।

“तुम हमें बहुत पहले खो चुके हो।”

राघव ने धीरे से अपनी शादी की अंगूठी उतारी और मेज़ पर रख दी। वह आवाज़ बहुत छोटी थी… लेकिन मीरा को लगा जैसे पूरा घर टूट गया हो।

दरवाज़े से बाहर जाने से पहले उसने पिहू के कमरे की तरफ देखा।

“क्या मैं कल उससे मिल सकता हूँ?”

मीरा कुछ सेकंड तक उसे देखती रही।

फिर बोली, “वादा तभी करना जब निभा सको।”

राघव चला गया।

दरवाज़ा बंद होते ही घर में अजीब खालीपन फैल गया।

मीरा पिहू के पास जाकर लेट गई। बच्ची नींद में उसकी छाती से लग गई, जैसे दुनिया अभी भी सुरक्षित हो।

और तभी मीरा टूटकर रोई।

अपने पति के लिए नहीं।

उस दूसरी औरत के लिए भी नहीं।

बल्कि उस औरत के लिए… जो महीनों तक खुद को दोष देती रही जबकि उसकी शादी अंदर ही अंदर मर चुकी थी।

सुबह दरवाज़ा खुलने की आवाज़ से उसकी आँख खुली।

कमला आंटी रसोई में चाय बना रही थीं। हाथ में गरम समोसे थे।

“दरवाज़ा खुला था,” उन्होंने कहा। “और धोखा खाई औरत को अकेले सुबह नहीं देखना चाहिए।”

मीरा कुछ बोल नहीं पाई।

कमला आंटी ने पिहू को फर्श पर खेलते देखा और धीरे से कहा,

“कभी-कभी भगवान परिवार नहीं तोड़ता… सिर्फ उस इंसान को हटा देता है जो परिवार होने का नाटक कर रहा था।”

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