
भाग 1
“अगर आज मैंने उस रिपोर्ट को दोबारा नहीं पढ़ा होता… तो शायद मेरी कोख से पैदा होने वाला बच्चा किसी और औरत का कहलाता।”
जयपुर के उस छोटे फ्लैट में 31 साल की डॉ. अनिका मेहरा पूरी रात जागती रही। बाहर सुबह हो रही थी। अंदर उसकी दुनिया टूट रही थी।
टेबल पर रखी थी —
1 फर्जी IVF कंसेंट फॉर्म।
उसका नाम।
उसके नकली सिग्नेचर।
और नीचे लिखा था —
“Recipient: Tara Khanna.”
अनिका की उंगलियाँ काँप रही थीं।
16 हफ्ते का बच्चा उसके पेट में था।
लेकिन अब सवाल यह नहीं था कि पिता कौन है।
सवाल यह था —
माँ कौन बनने वाली थी?
राघव सामने कुर्सी पर बैठा था।
टूटा हुआ।
डरा हुआ।
और पहली बार सचमुच शर्मिंदा।
“मैंने ये कभी नहीं कराया,” उसने धीमी आवाज़ में कहा।
अनिका हँस पड़ी।
सूखी।
थकी हुई हँसी।
“तुमने बहुत कुछ नहीं किया… लेकिन होने दिया।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
तभी उसके फोन पर फिर मैसेज आया।
तारा।
“अगर बच्चा चाहिए… तो चुप रहो।”
अनिका का पूरा शरीर ठंडा पड़ गया।
भाग 2
पुलिस ने उसी दिन IVF क्लिनिक सील कर दिया।
पुराने रिकॉर्ड निकले।
हार्ड ड्राइव जब्त हुई।
और धीरे-धीरे गंदगी ऊपर आने लगी।
अवैध भ्रूण ट्रांसफर।
सरोगेसी नेटवर्क।
राजनीतिक कनेक्शन।
और बीच में —
करण खन्ना।
तारा का “गायब” भाई।
राघव ने सिर पकड़ लिया।
“हे भगवान…”
लेकिन सबसे बड़ा झटका अभी बाकी था।
क्लिनिक की लैब टेक्नीशियन ने बयान दिया —
“2 embryos बनाए गए थे।”
अनिका की साँस अटक गई।
2.
मतलब —
1 नहीं।
2 संभावित बच्चे।
तभी अधिकारी ने अग
