भाग 1
रेबेका ने जैसे ही माचिस की तीली जलाई, पूरा कमरा कुछ सेकंड के लिए सुनहरी रोशनी में डूब गया।
उसके हाथ काँप नहीं रहे थे।
अब नहीं।
मैथ्यू का पुराना नोट उसकी उँगलियों के बीच था—
“We deserve it.”
तीली धीरे-धीेरे कागज़ के कोने तक पहुँची।
और फिर आग ने शब्दों को खाना शुरू कर दिया।
वही शब्द… जिनके पीछे छिपकर मैथ्यू और उसके परिवार ने सालों तक उसका घर, उसका पैसा, उसका नाम… और उसकी आत्मा तक कब्ज़ा करने की कोशिश की थी।
लेकिन अब घर शांत था।
पहली बार सचमुच शांत।
न पेट्रिशिया की नकली प्रार्थनाएँ।
न क्लोई की ऊँची हँसी।
न मैथ्यू की वह आवाज़… जो हर बहस में खुद को पीड़ित बना लेती थी।
बस बारिश के बाद की ठंडी हवा।
और रेबेका की साँसें।
उस रात उसने अकेले खाना खाया।
लेकिन अकेलापन अब सज़ा जैसा नहीं लग रहा था।
वह आज़ादी जैसा लग रहा था।
सुबह 6 बजे फोन बजा।
विक्टोरिया थी।
“तुम जाग रही हो?”
“अब हाँ।”
उधर कुछ सेकंड चुप्पी रही।
फिर उसने धीरे कहा—
“मैथ्यू ने रात जेल में बिताई।”
रेबेका की आँखें बंद हो गईं।
कोई खुशी नहीं हुई।
बस थकान।
“और?”
“उसने फिर कोशिश की तुम्हें दोष देने की। लेकिन क्लोई ने पूरा बयान दे दिया।”
रेबेका खिड़की तक चली गई।
बाहर लॉस एंजेलिस की सड़कें बारिश से धुली चमक रही थीं।
“क्या उसने… बच्चे वाली बात भी बता दी?”
विक्टोरिया की आवाज़ भारी हो गई।
“हाँ।”
रेबेका का गला कस गया।
3 साल।
3 साल तक उसे अधूरी औरत महसूस कराया गया था।
हर पारिवारिक डिनर पर वही सवाल—
“अच्छी खबर कब दोगी?”
हर चर्च विजिट।
हर प्रेयर कार्ड।
हर वह मुस्कान… जिसमें दया से ज्यादा आरोप होता था।
और अब उसे पता चला—
वे सिर्फ़ इंतज़ार नहीं कर रहे थे।
वे योजना बना रहे थे।
उसे हटाने की।
बदलने की।
उसकी जगह 1 बच्चा लाने की… जो उसका होता ही नहीं।
“मैंने उससे प्यार किया था,” रेबेका फुसफुसाई।
विक्टोरिया ने धीरे कहा—
“मुझे पता है।”
“यही सबसे बुरा हिस्सा है।”
फोन कटने के बाद रेबेका काफी देर तक खड़ी रही।
फिर वह ऊपर बेडरूम में गई।
मैथ्यू की अलमारी आधी खाली थी।
लेकिन उसकी मौजूदगी अब भी हवा में थी।
सस्ता कोलोन।
लकड़ी वाले हैंगर।
1 पुरानी टाई… जो उसने पहली डेट पर पहनी थी।
रेबेका ने उसे हाथ में लिया।
और अचानक उसे वह लड़का याद आया… जो व्हाइट रॉक लेक के किनारे उसे नींबू वाला स्नो कोन खिलाता था।
जो कहता था—
“तुम्हारी महत्वाकांक्षा मुझे तुमसे प्यार करवाती है।”
शायद उसने सच कहा था।
शायद बाद में वही चीज़ उससे नफरत करवाने लगी।
रेबेका ने टाई वापस रख दी।
अब पुरानी यादों से चिपके रहने का समय खत्म हो चुका था।
उसी दोपहर वह अपने ऑफिस गई।
कर्मचारी उसे देखकर चुप हो गए।
उन्हें खबरें मिल चुकी थीं।
सोशल मीडिया, अखबार, बिजनेस ब्लॉग—
सब जगह मैथ्यू का नाम घूम रहा था।
“कॉर्पोरेट फ्रॉड।”
“फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी।”
“लक्ज़री लाइफस्टाइल स्कैम।”
रेबेका सीधा कॉन्फ्रेंस रूम में गई।
सभी सीनियर स्टाफ पहले से बैठे थे।
उसने बिना भूमिका के कहा—
“कंपनी सुरक्षित है। किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी। और 1 नई नीति लागू हो रही है।”
सबने उसकी तरफ़ देखा।
“अब किसी महिला कर्मचारी को पति, परिवार या ‘इमोशनल प्रेशर’ के कारण संयुक्त वित्तीय हस्ताक्षर के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। लीगल टीम मुफ्त सहायता देगी।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
1 महिला मैनेजर की आँखें भर आईं।
रेबेका समझ गई।
वह अकेली नहीं थी।
शाम को जब वह घर लौटी, गेट के बाहर 1 छोटी लड़की फूल बेच रही थी।
शायद 8 साल की।
“मैडम, फूल लीजिए ना।”
रेबेका रुकी।
“कौन से सबसे मजबूत हैं?”
लड़की उलझ गई।
“फूल मजबूत कैसे होते हैं?”
रेबेका हल्का मुस्कुराई।
“जो जल्दी नहीं मरते।”
लड़की ने पीले जंगली फूलों का छोटा गुच्छा आगे बढ़ाया।
“ये वाले। बारिश के बाद भी बच जाते हैं।”
रेबेका ने सारे फूल खरीद लिए।
उस रात उसने अपने दादाजी की फोटो के पास वही फूल रखे।
फिर धीरे से बोली—
“आप सही थे।”
कमरा शांत रहा।
लेकिन उसे ऐसा लगा जैसे कहीं दूर कोई गर्व से हँसा हो।
1 महीने बाद अदालत में आखिरी सुनवाई हुई।
मैथ्यू दुबला लग रहा था।
चेहरा थका हुआ।
अब उसके पास नकली रोलेक्स नहीं था।
न वह आत्मविश्वास… जो दूसरों के पैसों पर खड़ा था।
जज ने अंतिम दस्तावेज़ पढ़े।
तलाक मंजूर।
संपत्ति सुरक्षा आदेश कायम।
फ्रॉड केस ट्रायल के लिए आगे बढ़ेगा।
मैथ्यू बाहर निकलते समय रुका।
“तुम खुश हो अब?”
रेबेका ने उसे देखा।
बहुत ध्यान से।
उस आदमी को… जिससे उसने कभी पूरी जिंदगी बिताने का सपना देखा था।
फिर धीरे से बोली—
“नहीं।”
उसके चेहरे पर अजीब उम्मीद चमकी।
लेकिन रेबेका आगे बोली—
“मैं आज़ाद हूँ। और वह खुशी से बड़ी चीज़ है।”
मैथ्यू कुछ नहीं बोला।
वह चला गया।
इस बार सचमुच खाली हाथ।
अदालत की सीढ़ियों पर हवा चल रही थी।
शहर अपनी रफ्तार में भाग रहा था।
लोग हॉटडॉग खरीद रहे थे।
कोई टैक्सी रोक रहा था।
1 बच्चा कबूतर के पीछे भाग रहा था।
दुनिया किसी 1 औरत के टूटने या बचने के लिए रुकती नहीं।
लेकिन रेबेका रुक गई।
उसने गहरी साँस ली।
सालों बाद पहली साँस… जिसमें डर नहीं था।
फिर उसने फोन निकाला।
विक्टोरिया को मैसेज भेजा—
“घर चलते हैं।”
और पहली बार…
“घर” शब्द सुनकर उसके सीने में दर्द नहीं हुआ।
