भाग 2:
युवक फोटो को मुट्ठी में कसकर पकड़े हुए पंक्तियों के बीच से आगे बढ़ा।
वह किसी तमाशे के लिए नहीं आया था।
वह ऐसे चल रहा था जैसे वर्षों से किसी चेहरे को खोज रहा हो और अचानक उसे सभागार की रोशनी के नीचे, महंगी हील्स और एक वकील के पीछे खड़ा देख लिया हो।
मोनिका ने उसे बस एक पल देखा और तुरंत दूसरी ओर देखने लगी, मानो उसे न पहचानने से वह मिट जाएगा।
लेकिन युवक नहीं रुका।
—जब तुम तेपिक में रहती थीं, तब तुम्हारा नाम मोनिका रिवेरा था —उसने काँपती आवाज़ में कहा—। तुमने कहा था कि मेरी बहन के लिए दवा लेने जा रही हो और फिर कभी वापस नहीं आईं।
पूरा सभागार साँस लेना भूल गया।
अब्रिल ने नीली फ़ाइल बंद कर दी।
नतालिया ने माइक्रोफ़ोन नीचे कर दिया।
और मुझे लगा कि अट्ठाईस वर्षों से सीने में दबा मेरा गुस्सा अपना रूप बदल रहा है।
अब वह सिर्फ मेरी बेटियों के लिए नहीं था।
वह उन सभी बच्चों के लिए था जिन्हें इस औरत ने ऐसे छोड़ दिया था जैसे वे किसी होटल के कमरे हों।
मोनिका ने अपना पर्स सीने से लगा लिया।
—मैं नहीं जानती तुम कौन हो।
युवक ने तस्वीर ऊपर उठाई।
उसमें वह थी।
कम उम्र की।
समुद्र तट पर बैठी हुई।
दो छोटे बच्चों के साथ।
एक वह खुद था।
दूसरी चोटी वाली एक लड़की।
—मेरा नाम दारियो है। मेरी बहन का नाम लुसेरो था। तुमने हमें भी एक नोट छोड़कर छोड़ा था। नैपकिन पर नहीं। दवा की थैली पर।
उसने गहरी साँस ली।
—“मैं दो बीमार बच्चों का बोझ नहीं उठा सकती।”
लुसेरो को दमा था।
मैं छह साल का था।
मोनिका एक कदम पीछे हट गई।
उसके वकील ने उसके कान में कुछ फुसफुसाया, लेकिन उसने सुना ही नहीं।
वह स्क्रीन को घूर रही थी, जहाँ अब्रिल ने अभी-अभी और दस्तावेज़ प्रदर्शित किए थे—
जन्म प्रमाणपत्र।
नाम परिवर्तन।
शादियाँ।
छोड़े गए मुकदमे।
तीन अलग-अलग पते।
और पाँच बच्चे, जो अलग-अलग राज्यों में दर्ज थे।
मेरी बेटियों ने यह सब जिज्ञासा के लिए नहीं खोजा था।
उन्होंने इसलिए खोजा क्योंकि वे जानती थीं कि कोई औरत जो अट्ठाईस साल बाद एक वकील के साथ लौटती है, वह सिर्फ बेशर्मी लेकर नहीं आती।
वह झूठों का इतिहास लेकर आती है।
अब्रिल ने फिर माइक्रोफ़ोन उठाया।
उसने आवाज़ ऊँची नहीं की।
यही उसका सबसे खतरनाक तरीका था।
—श्रीमती मोनिका, आपने कानूनी रूप से मेरी और नतालिया की अभिभावकीय जिम्मेदारी छोड़ दी थी। आपने कभी गुज़ारा भत्ता नहीं दिया। कभी संपर्क करने की कोशिश नहीं की। कभी फ़ोन नहीं किया जब हम बीमार थीं। कभी किसी दीक्षांत समारोह में नहीं आईं। कभी यह नहीं पूछा कि हम खाना खाती हैं या नहीं।
उसने मोनिका की आँखों में देखते हुए कहा—
—आज आपको हमारी कंपनी पर कोई अधिकार नहीं है। लेकिन यह बात हम पहले से जानते थे। हम तो सिर्फ यह जानना चाहते थे कि आपने और कितनों को पीछे छोड़ दिया।
नतालिया ने फ़ाइल खोली और एक और दस्तावेज़ निकाला।
—दारियो और लुसेरो को तेपिक में छोड़ दिया गया था। उसके बाद कोलिमा में एक लड़का हुआ, जिसका नाम आंद्रेस दर्ज है। फिर आगुआस्कालिएंतेस में एक लड़की। और सबकी कहानियाँ लगभग एक जैसी हैं।
पहली बार मोनिका के चेहरे का रंग उड़ गया।
—इसका इस अस्पताल से कोई संबंध नहीं है।
—बिल्कुल है —नतालिया ने जवाब दिया—। क्योंकि आप यहाँ मातृत्व का दावा करने आई हैं जैसे वह कोई निवेश हो। और हम दुनिया को आपका “अधिकारों” वाला असली इतिहास दिखाना चाहते थे।
मोनिका के वकील ने बीच में बोलने की कोशिश की।
—मेरी मुवक्किलों को यहाँ से जाने का अधिकार है।
—बिल्कुल —अब्रिल ने कहा—। दरवाज़ा उधर है। लेकिन जाने से पहले यह जान लेना अच्छा होगा कि आपको कानूनी नोटिस भी मिलेगा। हमारी कंपनी की तरफ़ से नहीं, बल्कि लंबित मामलों के तहत—भरण-पोषण, परित्याग और संभावित पहचान धोखाधड़ी की जाँचों के संबंध में।
दारियो मंच के सामने खड़ा रहा।
मैंने उसकी ओर देखा और उसमें वह चीज़ देखी जिसे मैं बहुत अच्छी तरह पहचानता था—
वह शर्म और उम्मीद का मिश्रण, जो त्यागे हुए बच्चों में होता है, जब उनका एक हिस्सा अब भी किसी स्पष्टीकरण की उम्मीद करता है।
आख़िरकार मोनिका ने उसकी ओर देखा।
—मैंने अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश की थी।
—नहीं —उसने कहा—। आपने वही किया जो आप करना चाहती थीं।
उसने गहरी साँस ली।
—मेरी बहन तेरह साल की उम्र में मर गई। उसने मुझसे कहा था कि अगर मैं कभी तुम्हें ढूँढ़ लूँ, तो तुम्हें बता दूँ कि वह अब तुम्हारा इंतज़ार नहीं करती।
सभागार एक और तरह की खामोशी से भर गया।
ऐसी खामोशी जो किसी भी तालियों से भारी होती है।
मोनिका नहीं रोई।
यह बात मुझे जितना चौंकाना चाहिए था, उतना नहीं चौंकाया।
कुछ औरतें टूटे हुए जूते पर रो पड़ती हैं।
लेकिन मरे हुए बच्चे पर नहीं।
उसने बस जबड़ा भींच लिया और कहा—
—तुम सब खुद को जज समझते हो। मैंने भी बहुत दुख झेला है। मैं उस ज़िंदगी के लिए बनी ही नहीं थी।
तभी मैं खड़ा हुआ।
अट्ठाईस साल तक मैंने अब्रिल और नतालिया के सामने उसकी बुराई नहीं की थी।
मैं उनकी रगों में ज़हर नहीं भरना चाहता था।
लेकिन उस सुबह, उस अस्पताल के दरवाज़ों के सामने, जिसे मेरी बेटियों ने छात्रवृत्तियों, जागी हुई रातों और पुराने भूख भरे दिनों के सहारे खड़ा किया था, अब उसे बचाने का कोई कारण नहीं बचा था।
—किसी ने तुमसे परफेक्ट होने को नहीं कहा था, मोनिका। हमने सिर्फ इतना चाहा था कि तुम माँ बनो। या कम से कम उस त्याग की कीमत वसूलने वापस मत आओ जो तुमने कभी किया ही नहीं।
मेरी बेटियाँ मंच से नीचे उतर आईं।
अब्रिल ने मेरा एक हाथ पकड़ लिया।
नतालिया दूसरी तरफ़ आ खड़ी हुई।
कमज़ोरी से नहीं।
बल्कि इसलिए कि वे समझ गई थीं कि मैं भी उस रसोई में लौट गया हूँ।
उन दो बोतलों के पास।
तरबूज़ वाले नोट के सामने जो फ्रिज पर चिपका था।
मोनिका ने प्रवेश द्वार पर लगी पट्टिका की ओर देखा।
वही पट्टिका जिस पर मेरा नाम लिखा था।
फिर उसने कड़वी हँसी हँसी।
—तो यह सब उस तमाले बेचने वाले को संत बनाने के लिए है।
नतालिया उसके इतना करीब गई कि बिना माइक्रोफ़ोन के भी सब सुन सकें।
—हाँ।
उसकी आवाज़ स्थिर थी।
—क्योंकि वही रुका था।
क्योंकि जब एक रोती थी, वह दो को गोद में उठाता था।
क्योंकि उसने हमें कभी एहसान नहीं महसूस कराया।
क्योंकि उसने किताबें खरीदने के लिए अपनी अंगूठी बेच दी।
क्योंकि वह तब भी मौजूद था जब कैमरे नहीं थे।
वह तब था जब घर की बिजली तक नहीं भरी जाती थी।
उद्घाटन समारोह अब सामान्य तरीके से जारी नहीं रह सका।
पत्रकार सवाल पूछने लगे।
मोनिका का वकील उसे ढकने की कोशिश कर रहा था।
दारियो वहीं खड़ा रहा, ज़मीन को देखते हुए।
अब्रिल उसके पास गई और उससे कुछ कहा जो मैं सुन नहीं पाया।
उसने आँसुओं से भरी आँखों के साथ सिर हिलाया।
कुछ मिनट बाद मोनिका फुसफुसाहटों के बीच सभागार से बाहर चली गई।
आधी भी नहीं।
कुछ भी नहीं।
न कोई गले लगना।
न कोई तस्वीर।
न कोई जीत।
लेकिन जब मुझे लगा कि दुःस्वप्न खत्म हो गया है, दारियो मेरे पास आया और वह पुरानी तस्वीर मुझे थमा दी।
उसके पीछे धुंधली स्याही से एक नंबर लिखा हुआ था।
—मेरी बहन ने मरने से पहले इसे संभालकर रखा था —उसने कहा—। वह कहती थी कि अगर कभी मोनिका मिल जाए, तो “ग्वादलाहारा की जुड़वाँ बहनों” को भी ढूँढ़ना। उसे लगता था कि आप लोग हमें कुछ साबित करने में मदद कर सकती हैं।
मैंने अब्रिल की ओर देखा।
उसने तस्वीर ली, नंबर को ध्यान से देखा और अचानक गंभीर हो गई।
—पापा…
उसने धीरे से कहा।
—यह फ़ोन नंबर नहीं है।
उसने तस्वीर पलटी।
—यह एक गोद लेने की फ़ाइल का नंबर है।
और तभी हमें समझ आया—
मोनिका ने सिर्फ बच्चों को छोड़ा नहीं था।
शायद उनमें से कुछ को ऐसे सौंप दिया गया था जैसे वे कागज़ हों, जिन्हें कभी भी खोया जा सकता है।
आगे क्या हुआ…?
