भाग 2
—जान, क्या तुमने सच में कुछ नहीं किया?
मैंने सोफ़े से हेक्टर की ओर देखा।
उसके हाथ में वाइन का गिलास था, पैर पर पैर चढ़ाए बैठा था, और उसके चेहरे पर ऐसी शांति थी जो उसके परिवार को अपमान जैसी लग रही थी।
—हाँ, मैंने किया —मैंने कहा—। मैंने हिसाब लगाया।
दोना सेलिया ने खाली टपरवेयर अपने सीने से कसकर लगा लिए।
—हिसाब? कैमिला, अपने ऑफिस वाली बातें मत शुरू करो। आज शनिवार है। बच्चों को भूख लगी है।
मेरा देवर रोड्रिगो बंद पड़ी रसोई की ओर झाँका।
—चावल भी नहीं?
पैट्रिसिया ने उसे कोहनी मारी।
तीनों भतीजे मेज़ के पास खड़े थे, उलझन में। मुझे उनसे कोई गुस्सा नहीं था। कभी नहीं था। लेकिन वे मेरे बच्चे भी नहीं थे। और मैं वर्षों से ऐसे व्यवहार कर रही थी जैसे हों।
मैं धीरे से खड़ी हुई।
—आज मुफ़्त का पारिवारिक खाना नहीं मिलेगा।
“मुफ़्त” शब्द एक तमाचे की तरह गिरा।
दोना सेलिया का मुँह खुला रह गया।
—मुफ़्त? तुम हमें ऐसे देखती हो? भिखारी समझती हो?
—नहीं —मैंने जवाब दिया—। उन वयस्कों की तरह जो वर्षों तक खाते रहे, बचा हुआ खाना ले जाते रहे, राशन, दवाइयाँ, स्कूल का सामान, उपहार और एहसान माँगते रहे, लेकिन कभी यह नहीं पूछा कि उसका भुगतान कौन कर रहा था।
हेक्टर का चेहरा लाल हो गया।
—कैमिला, सबके सामने यह मत करो।
मैंने उसकी ओर देखा।
—तुमने मेरे सामने कहा था कि तुम मुझे पालते-पोसते-पोसते थक गए हो। मुझे लगा सबको पता होना चाहिए कि तुम आखिर क्या पाल रहे थे।
मैं डाइनिंग रूम तक गई और एक गुलाबी फ़ोल्डर उठा लिया।
उसमें बहुत सारे प्रिंटआउट थे।
हर एक पर तारीख, विवरण, राशि और रसीद थी।
मुझे कुछ गढ़ने की ज़रूरत नहीं थी। लॉजिस्टिक्स में मैंने सीखा था कि अव्यवस्था पर सबूत से काबू पाया जाता है। क्वेरेटारो इंडस्ट्रियल पार्क में, जहाँ मेरी कंपनी शिपमेंट और ऑटो पार्ट्स का समन्वय करती थी, एक गलत दर्ज इनवॉइस पूरी लाइन रोक सकती थी; मेरे घर में, एक बार-बार बोला गया झूठ वर्षों से मेरी गरिमा को रोक रहा था।
मैंने पहली शीट मेज़ पर रखी।
—मासिक किराना औसत: 18,400 पेसो। भुगतान मैंने किया।
दूसरी शीट।
—गैस, बिजली, पानी, इंटरनेट, प्लेटफ़ॉर्म, कॉलोनी मेंटेनेंस: भुगतान मैंने किया।
एक और।
—दोना सेलिया की दवाइयाँ: भुगतान मैंने किया।
मेरी सास ने पलकें झपकाईं।
—यह हेक्टर ने तुमसे कहा था।
—और मैंने भुगतान किया। दोनों बातें अलग हैं।
रोड्रिगो ने मज़ाक करने की कोशिश की।
—अरे भाभी, अब क्या हर टैको का हिसाब लोगी जो हमने खाया?
मैंने दूसरा फ़ोल्डर निकाला।
—हर टैको का नहीं। सिर्फ सालाना कुल खर्च का।
पैट्रिसिया की आँखें फैल गईं जब उसने रकम देखी।
—एक लाख अस्सी हज़ार…
—सिर्फ शनिवार के खाने पर —मैंने कहा—। इसमें जन्मदिन, स्कूल का सामान, खिलौने, बैग, बच्चों को लेने की पेट्रोल लागत या वे “उधार” शामिल नहीं हैं जो कभी वापस नहीं आए।
दोना सेलिया ने गुस्से से हँस दिया।
—ओह, तो अब तुम कहोगी कि परिवार को तुम्हें पैसे लौटाने चाहिए?
—नहीं। मैं कहूँगी कि परिवार को आभार मानना चाहिए था। और चूँकि ऐसा नहीं हुआ, अब हर कोई अपना खर्च खुद उठाएगा।
…
—यह कोई बचकाना गुस्सा नहीं है —मैंने कहा—। यह अंतिम हिसाब-किताब है।
मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया।
न पटककर।
न नाटक करके।
बस बंद कर दिया।
